मन्त्र
ते ह वाचमूचुः त्वं न उद्गायेति ।
तथेति । तेभ्यो वागुदगायत् ।
यो वाचि भोगस्तं देवेभ्य आगायत् यत् कल्याणं वदति तदात्मने ।
ते विदुः अनेन वै न उद्गात्रा अत्येष्यन्ति इति ।
तम् अभिद्रुत्य पाप्मना अविध्यन् ।
स यः स पाप्मा यदेव इदम् अप्रतिरूपं वदति स एव स पाप्मा ॥ २॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
| संस्कृत | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| वाचम् | वाणी |
| उद्गायेति | उद्गीथ गाओ |
| वाक् | वाणी |
| भोग | आनन्द या लाभ |
| कल्याणम् | शुभ वचन |
| पाप्मा | पाप या दोष |
| अप्रतिरूपम् | अनुचित / असत्य |
हिन्दी में व्याख्या
यह मन्त्र बताता है कि देवताओं ने वाणी (Speech) को उद्गीथ गाने के लिए चुना।
1. वाणी को उद्गीथ गाने के लिए कहा
देवताओं ने वाणी से कहा:
“तुम हमारे लिए उद्गीथ गाओ।”
वाणी ने उनकी आज्ञा स्वीकार की और उद्गीथ का गायन किया।
2. वाणी का दो प्रकार का फल
मन्त्र बताता है:
- वाणी का भोग (लाभ) देवताओं को मिला
- परन्तु शुभ वचन (कल्याणकारी वाणी) स्वयं वाणी के लिए रही
अर्थात् वाणी के द्वारा सत्य और शुभता प्रकट होती है।
3. असुरों का आक्रमण
असुरों ने देखा कि देवता इस शक्ति से विजयी हो सकते हैं।
इसलिए उन्होंने वाणी पर पाप का आघात किया।
4. पाप का प्रभाव
उसके कारण वाणी में दोष आ गया।
इसी कारण:
- कभी मनुष्य असत्य बोलता है
- कभी अनुचित वचन बोलता है
मन्त्र कहता है कि यही वाणी का पाप है।
दार्शनिक अर्थ
यह कथा प्रतीकात्मक है:
- वाणी = मनुष्य की बोलने की शक्ति
- देव = सद्गुण
- असुर = दोष
अर्थात् मनुष्य की वाणी में:
- सत्य बोलने की क्षमता भी है
- और असत्य बोलने की प्रवृत्ति भी।
English Explanation
This verse explains how the Devas asked Speech (Vāk) to chant the sacred Udgītha.
1. Speech Performs the Chant
The Devas asked Speech to sing the Udgītha.
Speech agreed and performed the sacred chant.
2. Dual Result of Speech
The benefits of speech went to the Devas, while the good and auspicious words remained with speech itself.
3. Attack by the Asuras
The Asuras realized that this power could defeat them.
So they attacked speech with sin (pāpmā).
4. Result
Because of this corruption, speech became imperfect.
This is why humans sometimes speak false or improper words.