Brihadaranyaka Upanishad 1.2.4 hindi english explanation

 

मन्त्र

सोऽकामयत द्वितीयो म आत्मा जायेतेति । स मनसा वाचं
मिथुनꣳ समभवदशनाया मृत्युस्तद्यद्रेत आसीत् स
संवत्सरोऽभवन् न ह पुरा ततः संवत्सर आस । तमेतावन्तं
कालमबिभर्यावान्संवत्सरस्तमेतावतः कालस्य परस्तादसृजत ।
तं जातमभिव्याददात् स भाणकरोत् सैव वागभवत् ॥ ४॥


हिंदी में व्याख्या

यह मन्त्र सृष्टि की उत्पत्ति, समय और वाणी के जन्म का दार्शनिक वर्णन करता है।

1. द्वितीय आत्मा की इच्छा

मन्त्र कहता है:

“सोऽकामयत द्वितीयो म आत्मा जायेतेति”

अर्थात् प्रारम्भ में जो एक परम चेतना थी, उसने इच्छा की कि मेरे समान दूसरा आत्मरूप उत्पन्न हो।

यही सृष्टि की शुरुआत की प्रेरणा है।


2. मन और वाणी का मिलन

फिर कहा गया:

“स मनसा वाचं मिथुनं समभवत्”

अर्थात् मन और वाणी का संयोग हुआ

यहाँ मन (चेतना) और वाणी (अभिव्यक्ति) के मिलन से सृष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।


3. बीज और काल का जन्म

मन्त्र में कहा गया है:

“तद्यद्रेत आसीत् स संवत्सरोऽभवत्”

जो बीज उत्पन्न हुआ, वही आगे चलकर संवत्सर (समय / वर्ष) बन गया।

इसका अर्थ है:

  • सृष्टि के साथ ही समय का भी जन्म हुआ
  • समय सृष्टि का मूल नियम है

4. समय के बाद सृष्टि का विस्तार

संवत्सर अर्थात् एक वर्ष के बराबर समय तक उस बीज को धारण किया गया।

उसके बाद सृष्टि का प्रकट होना प्रारम्भ हुआ।


5. वाणी का जन्म

जब वह सृष्टि उत्पन्न हुई तो उसने ध्वनि उत्पन्न की

मन्त्र कहता है:

“स भाणकरोत् सैव वागभवत्”

अर्थात् उसने ध्वनि की और वही वाणी (Speech) बन गई।

इसका अर्थ है:

  • ध्वनि ही वाणी का मूल है
  • वाणी ज्ञान और अभिव्यक्ति का माध्यम है

दार्शनिक अर्थ

यह मन्त्र तीन महान सिद्धान्त बताता है:

  1. इच्छा (कामना) से सृष्टि प्रारम्भ होती है
  2. समय (काल) सृष्टि के साथ उत्पन्न होता है
  3. ध्वनि और वाणी ज्ञान और सृष्टि की अभिव्यक्ति हैं

वेदों में इसलिए वाणी को दिव्य शक्ति माना गया है।


English Explanation

This verse describes the origin of creation, time, and speech.

1. Desire for a Second Self

The primordial consciousness desired:

"May another self be born from me."

This desire initiated creation.


2. Union of Mind and Speech

The verse says:

"He united mind and speech."

The union of mind (thought) and speech (expression) became the driving force of creation.


3. Birth of Time

The seed that emerged became Samvatsara (Time / Year).

This implies:

  • Time began with creation
  • Time governs the unfolding of the universe

4. Emergence of Creation

The seed was held for the duration of a year, after which creation manifested.


5. Birth of Speech

When the being was born, it made a sound.

That sound became speech (Vāk).

This symbolizes that sound is the origin of language and knowledge.


Main idea of the verse

Creation arises from:

  • Desire
  • Time
  • Sound / Speech

These are fundamental principles in Vedic cosmology.



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