संस्कृत श्लोक व्याख्या
आदित्यचन्द्रावनलानिलौ च – श्लोक व्याख्या
आदित्यचन्द्रावनलानिलौ च
द्यौर्भूमिरापो हृदयं यमश्च ।
अहश्च रात्रिश्च उभे च
धर्मश्च जानाति नरस्य वृत्तम् ॥
द्यौर्भूमिरापो हृदयं यमश्च ।
अहश्च रात्रिश्च उभे च
धर्मश्च जानाति नरस्य वृत्तम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
- आदित्यः – Sun / सूर्य
- चन्द्र – Moon / चन्द्रमा
- अवनल – Fire / अग्नि
- अनिलः – Wind / वायु
- द्यौः – Sky / आकाश
- भूमिः – Earth / पृथ्वी
- आपः – Water / जल
- हृदयं – Heart / हृदय
- यमः – Death / यम
- अहः – Day / दिन
- रात्रिः – Night / रात्रि
- धर्मः – Righteousness / धर्म
- वृत्तम् – Conduct / आचरण
हिन्दी अर्थ
सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी, जल, हृदय, यम, दिन और रात ये सभी जानते हैं कि मनुष्य का वास्तविक आचरण क्या है। अर्थात्, मनुष्य का धर्म और सही व्यवहार इन सभी महान तत्वों द्वारा देखा और जाना जाता है।
English Meaning
The Sun, Moon, Fire, Wind, Sky, Earth, Water, Heart, Death, Day, and Night — all of these know the true conduct of a person. In other words, the righteousness and proper actions of a human are recognized by these supreme elements and forces.
दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)
यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि मानव का धर्म और उसके आचरण केवल लोगों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ब्रह्मांड के सभी प्रमुख तत्व, प्राकृतिक शक्तियाँ और समय के चक्र इसे जानते हैं। इसलिए मनुष्य को हमेशा सत्कर्म और धर्म के अनुसार जीवन जीना चाहिए।
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