मन्त्र
सोऽकामयत मेध्यं म इदꣳ स्यादात्मन्व्यनेन स्यामिति ।
ततोऽश्वः समभवद् यदश्वत् तन्मेध्यमभूदिति ।
तदेवाश्वमेधस्याश्वमेधत्वं एष ह वा अश्वमेधं वेद य एनमेवं वेद ।
तमनवरुध्यैवामन्यत । तꣳ संवत्सरस्य परस्तादात्मन आलभत ।
पशून्देवताभ्यः प्रत्यौहत् तस्मात्सर्वदेवत्यं प्रोक्षितं प्राजापत्यमालभन्त ।
एष ह वा अश्वमेधो य एष तपति तस्य संवत्सर आत्मा ।
अयमग्निरर्कस्तस्येमे लोका आत्मानस्तावेतावर्काश्वमेधौ ।
सो पुनरेकैव देवता भवति मृत्युरेवाप पुनर्मृत्युं जयति ।
नैनं मृत्युराप्नोति मृत्युरस्याऽऽत्मा भवत्येतासां देवतानामेको भवति ॥ ७॥
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning)
| संस्कृत | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| सः | वह (परम चेतना) |
| अकामयत | इच्छा की |
| मेध्यम् | पवित्र यज्ञ |
| आत्मना | अपने द्वारा |
| अश्वः | घोड़ा |
| समभवत् | उत्पन्न हुआ |
| अश्वमेध | अश्व यज्ञ |
| संवत्सर | वर्ष |
| अग्नि | अग्नि |
| अर्क | सूर्य |
| लोकाः | लोक |
| मृत्यु | मृत्यु |
हिन्दी में विस्तृत व्याख्या
यह मन्त्र अश्वमेध यज्ञ के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को बताता है। यहाँ अश्वमेध केवल राजकीय यज्ञ नहीं बल्कि ब्रह्मांडीय प्रतीक है।
1. यज्ञ करने की इच्छा
मन्त्र कहता है:
“सोऽकामयत मेध्यं म इदं स्यात्”
अर्थात् परम चेतना ने इच्छा की कि
“मैं एक महान पवित्र यज्ञ करूँ।”
2. अश्व का उत्पन्न होना
उस इच्छा से अश्व (घोड़ा) उत्पन्न हुआ।
यहाँ अश्व का अर्थ केवल पशु नहीं है।
वेदों में अश्व = शक्ति, गति और प्राण का प्रतीक है।
3. अश्वमेध का वास्तविक अर्थ
मन्त्र कहता है:
“तदेव अश्वमेधस्य अश्वमेधत्वम्”
अर्थात् यही अश्वमेध का वास्तविक रहस्य है।
जो व्यक्ति इस ज्ञान को समझता है वही वास्तव में अश्वमेध का ज्ञाता है।
4. संवत्सर और सूर्य
मन्त्र में कहा गया है:
- सूर्य ही अश्वमेध का प्रतीक है
- संवत्सर (वर्ष) उसका आत्मा है
अर्थात् सूर्य का वर्ष भर का चक्र ही ब्रह्मांडीय यज्ञ है।
5. अग्नि और लोक
फिर कहा गया:
- अग्नि उसका प्रकाश है
- समस्त लोक उसका विस्तार हैं
इस प्रकार पूरा ब्रह्मांड एक महान यज्ञ है।
6. मृत्यु पर विजय
अन्त में मन्त्र कहता है:
जो इस ज्ञान को जानता है:
- वह मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है
- मृत्यु उस पर अधिकार नहीं कर पाती
यह ज्ञान उसे अमर आत्मा की अनुभूति कराता है।
English Explanation
This verse explains the symbolic and cosmic meaning of the Ashvamedha sacrifice.
1. Desire for a Sacred Sacrifice
The Supreme Being desired to perform a sacred sacrifice (medhya yajña).
2. Emergence of the Horse
From that intention arose the horse (ashva).
In Vedic symbolism, the horse represents:
- power
- energy
- cosmic movement
3. True Meaning of Ashvamedha
The text explains that the true Ashvamedha is symbolic knowledge, not merely a ritual.
One who understands this symbolism truly knows the Ashvamedha.
4. Sun and the Year
The verse states that:
- The Sun represents the Ashvamedha
- The year (samvatsara) is its soul
Thus the cosmic cycle of the Sun is itself a universal sacrifice.
5. Fire and the Worlds
Fire represents its energy and the worlds represent its expansion.
The universe itself becomes a living yajña.
6. Victory Over Death
One who realizes this truth transcends death.
Such a person understands the immortal nature of the Self.