मन्त्र
स ऐक्षत यदि वा इममभिमꣳस्ये कनीयोऽन्नं करिष्य इति ।
स तया वाचा तेनाऽऽत्मनेदꣳ सर्वमसृजत यदिदं
किञ्चर्चो यजूꣳषि सामानि छन्दाꣳसि यज्ञान् प्रजाः
पशून् स यद्यदेवासृजत तत्तदत्तुमध्रियत । सर्वं वा अत्तीति
तददितेरदितित्वꣳ । सर्वस्यैतस्यात्ता भवति सर्वमस्यान्नं भवति
य एवमेतददितेरदितित्वं वेद ॥ ५॥
हिंदी में विस्तृत व्याख्या
यह मन्त्र सृष्टि, वेदों की उत्पत्ति और “अदिति” के सिद्धान्त को समझाता है।
1. सृष्टि करने का विचार
मन्त्र कहता है:
“स ऐक्षत…”
अर्थात् परम चेतना ने विचार किया —
“मैं इस जगत की रचना करूँ और जीवों के लिए अन्न की व्यवस्था करूँ।”
यहाँ यह बताया गया है कि सृष्टि केवल पदार्थ नहीं है, बल्कि जीवन के पालन-पोषण की व्यवस्था भी है।
2. वाणी से सृष्टि की रचना
फिर कहा गया:
“स तया वाचा तेनात्मनेदं सर्वमसृजत”
अर्थात् उसने वाणी और अपनी शक्ति से सम्पूर्ण जगत की रचना की।
3. वेद और सृष्टि के अंग
मन्त्र में कहा गया कि सृष्टि के साथ ही उत्पन्न हुए:
- ऋचः (ऋग्वेद के मन्त्र)
- यजूंषि (यजुर्वेद के मन्त्र)
- सामानि (सामवेद के मन्त्र)
- छन्द (वेदों के छन्द)
- यज्ञ
- प्रजा (जीव)
- पशु (प्राणी)
अर्थात् धर्म, ज्ञान और प्रकृति — सब सृष्टि के साथ ही प्रकट हुए।
4. अन्न का सिद्धान्त
मन्त्र कहता है:
“स यद्यदेवासृजत तत्तदत्तुमध्रियत”
जिसे भी परमात्मा ने उत्पन्न किया, वह अन्न (जीवन का आधार) बन गया।
यहाँ अन्न का अर्थ केवल भोजन नहीं है, बल्कि संपूर्ण पोषण का सिद्धान्त है।
5. अदिति का अर्थ
मन्त्र कहता है:
“सर्वं वा अत्तीति तददितेरदितित्वम्”
जो सबको धारण करता है और सबका पोषण करता है, वही अदिति है।
अदिति का अर्थ:
- असीम
- अखण्ड
- सबको धारण करने वाली शक्ति
6. ज्ञान का फल
मन्त्र कहता है:
जो व्यक्ति अदिति के इस रहस्य को जानता है, वह:
- सबका पोषक बनता है
- उसके लिए सम्पूर्ण जगत अन्नस्वरूप हो जाता है
अर्थात् वह प्रकृति और जीवन के एकत्व को समझ लेता है।
English Explanation
This verse explains creation, the origin of the Vedas, and the principle of Aditi.
1. Intention to Create
The Supreme Consciousness thought:
"Let me create nourishment (food) for this universe."
Creation is therefore not just matter, but also a system for sustaining life.
2. Creation through Speech
The verse states that through speech (Vāk) and divine power, the entire universe was created.
3. Emergence of the Vedas
Along with creation appeared:
- Rigvedic hymns (Ṛc)
- Yajurvedic formulas (Yajus)
- Sāmaveda chants (Sāman)
- Vedic metres (Chandas)
- Sacrifices (Yajña)
- Beings (Prajā)
- Animals (Paśu)
Thus knowledge, ritual, and life itself arose with creation.
4. Principle of Nourishment
Whatever was created became food (sustenance) for life.
Here food symbolizes the cycle of nourishment and interdependence in nature.
5. Meaning of Aditi
Aditi means:
- the infinite
- the all-embracing reality
- the power that contains and sustains everything
6. Result of Knowledge
One who understands this truth becomes a knower of the cosmic order, seeing the universe as an interconnected system of life and nourishment.